माँ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि प्रेम और त्याग की पूरी दुनिया है। इसी भावना को संजोते हुए के.जी. पब्लिक सेकेंडरी स्कूल में "हर दिन माँ का दिन" (Every Day is Mother's Day) थीम पर एक भव्य और भावुक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 🌷
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि प्रोफेसर सुमन चावला और विशिष्ट अतिथि एडवोकेट रेनू चौधरी जी ने माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर की। 🪔
🎤 "माँ ही बच्चे की प्रथम गुरु है" (Inspiring Speeches)
कार्यक्रम में वक्ताओं ने माँ के महत्व पर प्रकाश डाला, जिसे सुनकर हॉल तालियों से गूंज उठा:
मुख्य अतिथि प्रो. सुमन चावला ने माँ को भगवान का दर्जा देते हुए कहा, "बच्चे माँ के संस्कारों से ही गढ़ते हैं। जैसे महाभारत में अभिमन्यु ने चक्रव्यूह भेदने की कला माँ के गर्भ में ही सीख ली थी, वैसे ही माँ द्वारा दिए गए संस्कार जीवन भर बच्चे का मार्गदर्शन करते हैं।" 🙌
विशिष्ट अतिथि एडवोकेट रेनू चौधरी ने कहा कि माँ ही बच्चे की पहली टीचर होती है, जो उसे संस्कारवान और प्रज्ञावान बनाती है।
संस्था प्रधान श्री अशोक सुथार ने भारतीय संस्कृति की याद दिलाते हुए कहा, "हमारी संस्कृति में मदर्स डे साल में एक बार नहीं, बल्कि हर दिन होता है। हमें वीर शिवाजी की माता जीजाबाई जैसी माताओं की आवश्यकता है ताकि बच्चे संस्कारी बनें और समाज में वृद्धाश्रमों की ज़रूरत ही न पड़े।" 🇮🇳
📸 सेल्फी, गेम्स और ढेर सारी मस्ती (Fun & Activities)
संस्कारों की बातों के साथ-साथ कार्यक्रम में मनोरंजन का भी पूरा तड़का था!
नन्हे-मुन्ने बच्चों और उनकी माताओं ने स्कूल प्रांगण में एक साथ सेल्फी (Selfie) लेकर पलों को यादगार बनाया। 🤳
माताओं के लिए 'वन मिनट गेम' (One Minute Game) और क्विज़ कॉन्टेस्ट आयोजित किए गए। विजेताओं को आकर्षक उपहार दिए गए। 🎁
🙏 आभार और व्यवस्था (Gratitude & Management)
स्कूल की मैनेजिंग डायरेक्टर श्रीमती डिंपल सुथार ने आए हुए अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया।
समारोह में श्रीमती विमला स्वामी (श्रीनगर प्रिंसिपल), श्रीमती निर्मला सुथार और अध्यापिका श्रीमती सिंपल सुथार ने भी अपने विचार रखे।
मंच संचालन: श्रीमती राधा खत्री और श्रीमती प्रवीण सुखीजा ने बहुत ही खूबसूरती से मंच संभाला। 🎙️
व्यवस्था: वरिष्ठ अध्यापक हरविंदर सिंह और सलीम खान जी ने व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी निभाई, जबकि श्रीमती मोनिका मैम ने अनुशासन बनाए रखा।
यह कार्यक्रम न केवल एक उत्सव था, बल्कि माँ के प्रति सम्मान और प्रेम प्रकट करने का एक माध्यम बन गया। ❤️